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Xiaomi battery blast : क्या कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट पर अधिक ध्यान देना चाहिए?

स्मार्टफ़ोन हमारे लाइफ का एक अभिन्न अंग बन चुका है. अगर आपके पास स्मार्टफ़ोन है तो आप घर बैठे खाना आर्डर, शौपिंग, अपने बिल्स को जमा कर सकते हैं. जियो के 4G सर्विस लॉन्च के बाद भारत में स्मार्टफ़ोन को तादाद और बढ़ गई है. बढ़ती डिमांड ने स्मार्टफ़ोन मार्किट में बहुत अधिक कम्पटीशन कर दिया है. कंपनियों में सस्ते से सस्ता स्मार्टफ़ोन लॉन्च करने की होड़ सी मच गई है. अधिक कम्पटीशन ने कंपनियों के रिसर्च और डेवलपमेंट को काफी हद्द तक कम कर दिया है और सारी कंपनियां आंख बंद कर के वेंडर कंपनियों से पार्ट्स बनवा रही हैं.

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अभी हाल में ही शाओमी के रेडमी नोट 4 में आग लगने का केस सामने आया है. इस घटना के CCTV फुटेज में देखा गया कि फ़ोन बुरी तरह आग में जलने लगा. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है पिछले साल सैमसंग गैलेक्सी नोट 7 के बैटरी में आग लगने के कई केस सामने आये थे. जिसके बाद कंपनी को गैलेक्सी नोट 7 फ़ोन वापस लेना पड़ा. इन घटनाओं के बाद सवाल यह उठता है कि जिस तरह बैटरी में आग लगने के केस आ रहे हैं, क्या ये स्मार्टफ़ोन हमारे लिए जानलेवा हो गये हैं?

इसलिए इस आर्टिकल के माध्यम से हम आप से यह सवाल करना चाहते हैं कि “क्या स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों को फ़ोन लॉन्च करने से पहले अच्छे से रिसर्च करना चाहिए. क्योंकि आपके एक स्मार्टफ़ोन से किसी की ज़िन्दगी भी जा सकती है.” अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें.

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