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Two Line Shayari | Latest Hindi Shayari | Shayari123

एक चाहत थी.. तेरे साथ जीने की,
वरना, मोहब्बत तो किसी से भी हो सकती थी।


कोशिश हज़ार की के इसे रोक लूँ मगर,
ठहरी हुई घड़ी में भी.. ठहरा नहीं ये वक्त।


मुझको छोड़ने की वजह.. तो बता देते,
मुझसे नाराज थे या मुझ जैसे हजारों थे।


शायरी भी एक खेल है शतरंज का,
जिसमे लफ़्ज़ों के मोहरे मात दिया करते हैं एहसासों को।


कागज के बेजान परिंदे भी उड़ते है,
जनाब, बस डोर सही हाथ में होनी चाहिए।


मुझे तलाश है उन रास्तों कि, जहां से कोई गुज़रा न हो,
सुना है.. वीरानों मे अक्सर, जिंदगी मिल जाती है।


मोहब्बत की शतरंज में वो बड़ा चालाक निकला,
दिल को मोहरा बना कर हमारी जिन्दगी छीन ली।


गलतफहमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मोहब्बत में,
जहाँ किरदार हल्का हो, कहानी डूब ही जाती है।


जहाँ भी ज़िक्र हुआ सुकून का..
वहीँ तेरी बाहोँ की तलब लग जाती हैं।


बहुत से लोग कहते है मोहब्बत जान ले लेती है..
मोहब्बत जान नहीं लेती है बिछड़ने पर यादें अंदर से तोड़ जाती है।

बड़ी अजीब है ये मोहब्बत..
वरना अभी उम्र ही क्या थी शायरी करने की।


कोई तो आ के रुला दे कि हँस रहें हैं,
बहुत दिनों से ख़ुशी को तरस रहें हैं।





तेरा आधे मन से मुझको मिलने आना,
खुदा कसम मुझे पूरा तोड़ देता है।


‪धड़कनो मे बस्ते है कुछ लोग,
जबान पे नाम लाना जरूरी नही होता।


उसकी याद आयी है सांसो जरा अहिस्ता चलो,
धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता है।


मेरी रूह गुलाम हो गई है तेरे इश्क़ में शायद,
वरना यूँ छटपटाना मेरी आदत तो ना थी।


शर्म नहीं आती उदासी को जरा भी,
मुद्दतों से मेरे घर की महेमान बनी हुई है।


मैं शिकायत क्यों करूँ, ये तो क़िस्मत की बात है,
तेरी सोच में भी मैं नहीं, मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ तू याद है।


काश.. बनाने वाले ने थोड़ी-सी होशियारी और दिखाई होती,
इंसान थोड़े कम और इंसानियत ज्यादा बनाई होती।


‪रोता वही है जिसने महसूस किया हो सच्चे रिश्ते को,
वरना मतलब के रिश्तें रखने वाले को तो कोई भी नही रूला सकता।


कौन कहता है अलग अलग रहते हैं हम और तुम,
हमारी यादों के सफ़र में हमसफ़र हो तुम।


कौन कहता है के तन्हाईयाँ अच्छी नहीं होती,
बड़ा हसीन मौका देती है ये ख़ुद से मिलने का।


वो दुश्मन बनकर, मुझे जीतने निकले थे,
दोस्ती कर लेते, तो मैं खुद ही हार जाता।


वो सुर्ख होंठ और उनपर जालिम अंगडाईयां,
तू ही बता, ये दिल मरता ना तो क्या करता।


कौन कहता है कि हम झूठ नही बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखिये।


दर्द की शाम है, आँखों में नमी है,
हर सांस कह रही है, फिर तेरी कमी है।


सारे साथी काम के, सबका अपना मोल,
जो संकट में साथ दे, वो सबसे अनमोल।


मोहब्बत हमारी भी, बहुत असर रखती है,
बहुत याद आयेंगे, जरा भूल के तो देखो।


शोर करते रहो तुम.. सुर्ख़ियों में आने का..
हमारी तो खामोशियाँ भी, एक अखबार हैं।


सीख नहीं पा रहा हूँ मीठे झूठ बोलने का हुनर,
कड़वे सच से हमसे न जाने कितने लोग रूठ गये।


हम ने रोती हुई आँखों को हसाया है सदा,
इस से बेहतर इबादत तो नहीं होगी हमसे।